गर्भ रक्षा कवच मंत्र और टोटके

गर्भ रक्षा कवच मंत्र और टोटके
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गर्भ रक्षा कवच मंत्र और टोटके

गर्भ रक्षा कवच मंत्र और टोटके, प्रत्येक लड़की और उसका परिवार चाहता है कि विवाह के बाद वह समय पर गर्भधारण कर ले। ताकि वह स्त्रीत्व और मातृत्व सुख का आनंद उठा सके। सौभाग्य से इसमें उसे सफलता भी मिल जाती है। उसके बाद भी चिंता सताती रहती है कि उसकी हर कीमत पर कैसे सुरक्षा हो पाए।

गर्भ रक्षा कवच मंत्र और टोटके
गर्भ रक्षा कवच मंत्र और टोटके

 

इस संबंध में देवी-देवताओं की वैदिक पूजा, मंत्र जाप, साधनाएं, ज्योतिषीय उपाय और टोटके बताए गए हैं। इससे गर्भ में पल रहे बच्चे की सुरक्षा होती है और गर्भवती स्त्री को भी प्रसवकाल के दौरान किस भी तरह की कोई परेशानी नहीं हो पाती है।

प्रसव भी सुरक्षित होता है। कोई भी गर्भवती स्त्री उनमें से किसी का भी उपाय कर सकती है। इस उपाय को परिवार के सदस्य द्वारा भी किया जा सकता है। जो गर्भवती औरत की सास, मां या बुआ हो सकती हैं। 

हर दिन मंत्र का जाप 

  किसी भी गर्भवती स्त्री की एकमात्र इच्छा होती है कि उसकी होने वाली संतान स्वस्थ, तंदुरूस्त और सौभाग्यशाली हो। संतान के जीवन में आजीवन कोई परेशानी नहीं आने पाए। ज्योतिष शास्त्र में इसके लिए एक मंत्र बताया गया है, जिसका गर्भवती औरत द्वारा प्रतिदिन प्रातः सूर्योदय के पहले स्नान के बाद  जाप करना चहिए।

इससे उसके संतान संतान के सुरक्षित प्रसव तक कोई संकट नहीं आएगा। संतान को भी अच्छा स्वास्थ्य मिलेगा। यानी उसके द्वारा किए जाने वाले मंत्र जाप का लाभ संतान के भाग्य पर भी होगा। इसके लिए विधि-विधान इस प्रकार किए जाने चाहिए।

  • इस उपाय को गर्भ धारण से पहले ही शुरू किया जाना चाहिए। खासकर उसके बाद से ही जब उसने पति के साथ पहला सहवास किया हो। अगर कोई स्त्री गर्भवती है, तो उसे  गर्भधारण के बाद पहले या मध्यम चरण में करना चाहिए।
  • उसका पति अगर अधिकतर घर से टूर पर रहता हो तो मंत्र जाप के लिए बनाया जाने वाला आसन उसी दिशा में होना चाहिए, जिधर की टूर हो।  
  • मंत्र व जाप विधि के शुरू करने से पहले गर्भवती औरत को भगवान शिव की संतान भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर रखें। उसके सामने बैठकर ही मंत्र जाप किया जाना चाहिए। 
  • भगवान गणेश की विधिवत पूजन करें और उन्हें कम से कम दो मोदक का भोग भी लगाएं।  मोदक गर्भवती औरत के हाथों से बने होने चाहिए और पूजा के बाद प्रसाद के तौर पर उसे ही खाने चाहिए। मोदक का यह प्रसाद अन्य किसी भी परिवार के सदस्य को नहीं देना चाहिए। 
  • पूजन के बाद रूद्राक्ष की माला से 108 बार जाप किया जाने वाला मंत्र इस प्रकार है- 

रक्ष रक्ष गणाध्यक्षः रक्ष त्रैलोक्य नायकः।

भक्त नाभयं कर्ता त्राताभव भवार्णवात।

  • विशेष सतर्कताः इस मंत्र का प्रतिदिन 108 बार जाप करना चाहिए। प्रसव का समय निकट आने पर जाप की संख्या बढ़ानी चाहिए। मंत्र जाप और अनुष्ठान का समय प्रातः पांच बजे से पहले होना चाहिए। मोदक का भोग सप्ताह में एक बार ही लगाया जाना चाहिए। 

गर्भ रक्षा मंत्र

किसी विवाहिता का गर्भाधान उसके जीवन की एक अभिन्न और असाधारण घटना होती है। इसे वह दूसरों की नजरों से बचाकर रखती है और अपनी जान की बाजी लगाकर भी रक्षा करती है। इसके लिए निम्नलिखित शाबर मंत्र का विधिवत जाप करें। 

मंत्रः ऊँ नमो थाथा मोथा, मेरा कहा कीजिए।

अमूक का गर्भ जाते राखि लीजिए।

गुरु की शक्ति, मेरी भक्ति फुरो मंत्र ईश्वरोवाचा।

इसका आयोजन रविवार की आधी रात को किया जाता है। गर्भवती विवाहिता के परिवार के किसी सदस्य द्वारा जाप से पहले कीदृशी नामक राक्षसी की पूजा करनी चाहिए। पूजा के समय उसे साथ में बैठना जरूरी होता है। धूप दीप जलाने और फूल-प्रसाद चढ़ाने के बाद काले धागे को हाथ में रखकर दिए गए मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए।

मंत्र में अमुक की जगर स्त्री का नाम लिया जाना चाहिए। इस जाप से धागा अभिमंत्रित हो जाता है, जिसे गर्भवती को पहना देना चाहिए। इस उपाय से गर्भ की पूरी रक्षा होती है। उसका कभी भी नुकसान नहीं हो पाएगा।  

 स्तोत्र से गर्भ की रक्षा  

गर्भ में पल रहे बच्चे के जन्म से पहले कई तरह से रक्षा करनी होती है। डाक्टरी देखरेख और खानपान पर विशेष ध्यान रखा जाता है। फिर भी कई तरह की जटिलताओं के चलते शिशु गर्भ में असुरक्षित बना रहता है। पुराणों में गर्भ धारण करने के साथ ही स्त्रियों के लिए श्रीगर्भ रक्षाम्बिका स्तोत्रं का उच्चारण के साथ पढ़ने का उपाय दिया गया हैः- 

श्रीमाधवी काननस्ये गर्भ

रक्षांबिके पाही भक्ताम् स्थुवन्तम। 

वापी तटे वाम भागे, वाम देवस्य देवी स्थिता त्वां, मानया वारेन्या वादानया, 

पाही, गर्भस्या जन्थुन तथा भक्ता लोकान (1)

श्रीगर्भ रक्षा पुरे या दिव्या, सौंन्दर्या युक्ता,सुमंगलया गात्री,

धात्री, जनीत्री जनानाम, दिव्या, रुपाम ध्यारर्दाम मनोगनाम भजे तं (2) 

आषाढ मासे सुपुन्ये, शुक्र,  वारे सुगंन्धेना गंन्धेना लिप्ता,

दिव्याम्बरा कल्प वेशा वाजा, पेयाधी याग्यस्या भक्तस्या सुद्रष्टा (3)

कल्याण धात्रीं नमस्ये, वेदी, कंगन च स्त्रीया गर्भ रक्षा करीं त्वां,

बालै सदा सेवीथाअन्ग्रि, गर्भ रक्षार्थ, माराधुपे थैयुपेथाम (4) 

ब्रम्होत्सव विप्र विद्ययाम वाद्य, घोषेण तुष्टाम रथेना सन्निविष्टाम्

सर्व अर्थ धात्रीं भजेअहम, देव वरूंदैरा पीड़ायाम जगन मातरम त्वां (5) 

येतथ कृतम स्तोत्र रत्नम, दीक्षीथ ,अनन्त रामेन देव्या तुष्टाच्यै

नित्यम् पाठयस्तु भक्तया, पुत्र-पौत्रादि भाग्यं भवे तस्या नित्य (6)

चमत्कारी टोटके

गर्भ की रक्षा के लिए निम्नलिखित कुछ टोटके दिए गए हैं, जिन्हें आसानी से किया जा सकता है। इसका असर बहुत ही चमत्कारी होता है। इस मामले में जरा भी नजरंदाज नहीं किया जाना चाहिए कि परिवार और समाज में ऐसे लोगों की कमी नहीं है, जो गर्भस्थ बच्चे पर बुरी नजर रखते हैं। वे बच्चे और मां तक को क्षति पहुंचाने के के प्रयत्न करते हैं। इस वजह से कई औरत बार-बार गर्भपात का शिकार हो जाती हंै। टोटके हैंः- 

  • गाये के दूध में पदमाख, लाल चन्दन, खस को बारबर मात्रा में मिलाकर पीस लें। इसका एक चम्मच प्रतिदिन पांच दिनों तक करें। इससे गर्भपात नहीं होता है। किंतु हां इस बारे में चिकित्सक की हिदायतों का भी ध्यान रखें। इसी तरह से मुलहठी देवदारु, सिरस के बीज को काली गाय के दूध में बारबर मात्रा में मिलाकर पीने से भी गर्भपात नहीं होता है।
  • ज्योतिष के सलाह के अनुसार सिद्ध महामृत्युंजय यन्त्र धारण करें। इससे गर्भ गिर ही नहीं सकता है। यंत्र धारण के समय महामृत्युंजय मंत्र और गायत्री मंत्र का 108 बार जाप अवश्य करें।
  • ज्योतिष के बताए गए निर्देशानुसार गर्भवती औरत को कमर में काले घागे से लाजवर्त धारण करना चाहिए।
  • जिस औरत का गर्भपात हो चुका हो। खासकर पहली ही बार के गर्भ कुछ दिनों में ही गिर गया हो, तो उसे कुम्हार के हाथों में लगी मिट्टी से टोटका करना चाहिए। उस मिट्टी के बराबर मात्रा में शहद मिला दें। उसे चाट लें। उसके बाद बकरी का एक ग्लास दूध पी लें। इससे गर्भपात नहीं होगा।

गोपनीय तांत्रिक प्रयोग

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