मुर्गे की हड्डी से वशीकरण

मुर्गे की हड्डी से वशीकरण

मुर्गे की हड्डी से वशीकरण, तांत्रिकों और दूसरे वैदिक गुरुओं एवं ज्योतिषियों के द्वारा वशीकरण के विभिन्न तरीकों को दो विशेष वर्गों में बांटा गया हैं। इसके अतिरिक्त मुस्लिम धर्मावलंबियों के बीच शाबर मंत्र की मान्यताएं हैं। इनसे जुड़े साधारण से लेकर असाधरण किस्म के टोटके भी अपनाए जाते हैं।

एक वर्ग के वशीकरण में शाकाहार और वैदिक रीति-रिवाज के षोड्शोपचार की पूजा-विधि को अपनाया जाता हे, जबकि दूसरे वर्ग के वशीकरण में मांस, शराब, हड्यिां, खून आदि वस्तुओ की तांत्रिक-मांत्रिक साधनाएं होती हैं। इनमें उल्लू, चमगादड़, कबूतर या मुर्गे का उपयोग होता है। 

मुर्गे की हड्डी से वशीकरण
मुर्गे की हड्डी से वशीकरण

वशीकरण की तांत्रिक साधना के लिए मुर्गे को बली देने की प्रथा सदियों से चली आ रही है। मुर्गा आसानी से उपलब्ध जीवों में से एक है और यह तांत्रिक के आदेश का सहर्ष पालन कर लेता है और तांत्रिक वशीकरण  प्रायोग किए गए व्यक्ति को तेजी से प्रभावित कर देता है। मुर्गे के टांगों की हड्डियों में आकर्षण की अद्भुत क्षमता होती है।

उसका नाम सुनते ही भूखे व्यक्ति के मुंह से लार टपकने लगता है। जबकि टांगों मांस में पाए जाने वाले प्रोटिन से शारीरिक तंदुरूस्ती मिलती है और हड्डियों में पाया जाने वाला ताकतवर रसायन कैल्सियम शरीर की हड्डियों को मजबूती देने के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है।

वैसे मुर्गे के खून के एक-एक बूंद से वशीकरण की साधनाएं पूर्ण होती हैं। इस तरह के असाधारण वशीकरण को उसकी जरूरत एवं शीघ्र प्रभाव के लिए किया जाता है। इनके वलि देने से शत्रु का समन संभव है, तो दांपत्य जीवन में आकर्षण को मजबूती मिलती है। पति-पत्नी या प्रेमी युगल के बीच आपसी संबंधों की प्रगाढ़ता और मधुरता बढ़ती है।

यानि कि दोनों वर्गो के वशीकरण का उद्देश्य मनोवांछित व्यक्ति को अपने वश में करना और उसे हमेशा के लिए सम्मोहित किए रखना है, लेकिन इनका इस्तेमाल वशीकरण की तीब्रता, प्रभाव और व्यक्ति के लिंग, उम्र, स्वरूप, सामाजिक और पारिवारिक महत्व, व्यक्तित्व  या कहें उसकी स्थिति पर निर्भर करता है। 

सामान्यतः वशीकरण स्त्री द्वारा पुरुष को अपने वश में करने के लिए किया जाता है, जबकि कई वशीकरण के उपाय पुरुष द्वारा स्त्री को अपने वश में बनाए रखने के लिए होते हैं। उनका मकसद स्त्री का मान-सम्मान और पारिवारिक प्रतिष्ठा बनाए रखने की होती है। इनके लिए ज्यादातर सात्विक तरीके का प्रयोग किया जाता है।

ये घेरों में उपलब्ध समानों में मसाले, कपड़े, भोजन सामग्री, या फिर प्रकृति में पाए जाने वाले दुर्लभ और सहजता से उपलब्ध पेड़-पौधे व फूलों से किए जाते हैं। और इसके लिए हिंदू रीति-रिवाज के धार्मिक अनुष्ठान  सात्विक तरीके से किए जाते तो कुछ के लिए अधोर साधनाएं की जाती हैं।

मुर्गे की बलिः तांत्रिक साधना के समय मुर्गे की बलि दी जाती है। जबकि झारखंड के रहने वाले  आदिवासियों का मानना है कि अमावस्या की रात्री को लाल रंग के मुर्गे की बलि देने से उनके इष्टदेव प्रसन्न हो जाते हैं।

इससे घर मंे सुख-शांति आती है। इसके अतिरिक्त देश के अधिकतर देवी काली के मंदिरों मे मुर्गे की बलि का चलन है। यह भगवान को खुश करने के लिए नारियल फोड़ने और वशीकरण आदि संबंधी जादू-टोना के लिए नींबू काटने की तरह होता है। 

वशीकरण के लिए तांत्रिक के साथ बैठकर मंत्र जाप और मुर्गे को बलि देने की साधना की जाती है। इस साधना से मां काली को प्रसन्न किया जाता है और वशीकरण में बाधा बनी नकारात्मक शक्तियां दूर हो जाती हैं। बलि के बाद मुर्गे के मांस का सेवन किया जाता है।

इस मांस को जिस किसी व्यक्ति के आहार में शामिल कर दिया जाए उसका वशीकरण सुनिश्चित है। यदि वशीभूत किया जाने वाला व्यक्ति मांसाहारी है, तब तो उसे खिलाने में कोई समस्या नहीं आएगी लेकिन शाकाहारी के लिए उसके नाम से मांस का वितरण कर दिया जाना चाहिए।

मुर्गे की बलि न केवल सुख-शांति के लिए दी जाती है, बल्कि देश के कई इलाके में अनोखी परंपरा के तौर पर निर्वा किया जाता है। जैसे छत्तीसगढ़ के कई इलाके में आषाढ़ लगते ही किसान बीजारोपण से पहले मुर्गे की बलि दी जाती है। ऐसा बैगा जनजाती के ग्रामीणों के द्वारा किया जाता है।

इस परंपरा के अनुसार सभी किसान अपने-अपने घरों से धान, अरहर, कोदो, कुटकी, साम्बा, जुआर, मक्का, तिल आदि अनाज की थोडी-थोड़ी मात्रा के साथ इकट्ठा होते है। उन्हें एकसाथ मिला देते हैं। बीजों के इस ढेर की  6 या 9 मुर्गी, 5 नारियल और तीन बोतल महुआ के साथ पूजा करते हैं। उसके बाद मुर्गे की बलि दी जाती है।  

मुर्गे की हड्डी: तांत्रिक साधना के जरिए वशीकरण में एक और महत्वपूर्ण सामान मुर्गे की हड्डी है। उसके टोंगों की वह हड्डी खास माना गया है। उसकी टांगों में दो हड्डियां जुड़ी होती है। एक पतली हड्टी मोटी हड्डी के साथ जुड़ी होती है। इसे आपसी वशीकरण को मजबूती प्रदान करने के नजरिए से देखा जाता है।

वशीकरण की साधाना के लिए दोनों हड्डियां उपलब्ध कर लें। उन्हें अच्छी तरह से साफ करें। ध्यान रहे वे टूटी नहीं हों। रात्री के समय ठीक 12 बजे सुनसान स्थन पर उत्तर दिशा की ओर मुखकर बैठ जाएं। साथ में एक सफेद कागज और लाल स्याही का पेन रखें। दोनों हड्डियों में बड़ी और मोटी हड्डी के ऊपर वशीकरण किए जाने वाले व्यक्ति के साथ – साथ अपना नाम लिख दें। 

इसी तरह से सादे कागज पर भी अपना और वशीकरण के व्यक्ति का नाम लिखें। उनके बीच जोड़ का निशान जरूर बनाएं। दोनों नाम एक पंक्ति में लिखें। उसके नीचे स्वस्तिक के तीन चित्र बनाएं। उसके बाद दोनों हड्डियों को सफेद कागज में लपेट दें। लिपटी हड्डियों को काले या लाल धोगे से कसकर बांध दें। उसे अपने दाएं हाथ में लेकर देवी काली के नौ अक्षरों वाले मूल वशीकरण मंत्र का 108 बार जाप करें। यह प्रक्रिया कुल 11 दिनों तक दुहराते रहें। वह मंत्र हैः-ऊँ एं ह्रीं क्लीं चमाुण्डाय विच्चैं। 

11वें दिन देवी काली के 22 अक्षरी मंत्र का 51 बार जाप करते हुए हवन करें। अंत में मुर्गे की दोनो हड्डियां अग्नि को समर्पित कर दें। इस मंत्र से आपसी प्रेम में बाधक बनी नकारात्मक शक्तियां दूर हो जाएंगी और वशीकरण की सकारात्मकता का ऐहसास होगा। हवन का वह मंत्र हैः- ऊँ क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं स्वाहा!

गोपनीय तांत्रिक प्रयोग